भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे बिहार की भूमिका (1857-1947 तक )का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • चेतन कुमार शोधार्थी, इतिहास विभाग, फोनिक्स विश्वविद्यालय, रुड़की
  • डॉ. पूनम सहायक आचार्य, इतिहास विभाग, फोनिक्स विश्वविद्यालय, रुड़की

Abstract

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे बिहार की भूमिका (1857-1947 तक )का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

References

डॉ. काली किंकर दत्ता (K.K. Datta):पुस्तिका: "History of the Freedom Movement in Bihar" (तीन खंड) - यह बिहार केस्वतंत्रता संग्राम का सबसे प्रामाणिकसरकारी दस्तावेज़ माना जाता है।

स्टी3फन हेनिंगम (Stephen Henningham): पुस्तिका: "Peasant Movements in Colonial Bihar: 1917-1942" -यह पुस्तकनिचले स्तर के जन-आंदोलनों औरसामाजिक संरचना पर प्रकाश डालतीहै।

डॉ. जे.एस. झा (J.S. Jha): पुस्तिका: "Early Revolutionary Movement in Bihar" -बिहार मेंक्रांतिकारी गुप्त संगठनों और युवाओंकी भूमिका पर आधारित।

अरविन्द एन. दास (Arvind N. Das): पुस्तिका: "The Republic of Bihar" - बिहार केसामाजिक-आर्थिक इतिहास औरराजनैतिक चेतना के विकास काविश्लेषण|

प्रमुख समाचार पत्र (Primary Journalistic Sources): दि सर्चलाइट (The Searchlight): यह समाचार पत्र बिहार में राष्ट्रीयचेतना का मुख्य स्वर था, जिसनेसविनय अवज्ञा और भारत छोड़ोआंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिकानिभाई।

बिहार हड़प /दि बिहारी (The Beharee): पृथक बिहार प्रांत के गठन औरशुरुआती राष्ट्रवादी गतिविधियों केदस्तावेजीकरण के लिए प्रसिद्ध ।

हुंकार (Hunkar): स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारासंचालित, जिसने किसानों कीसमस्याओं और उनके आंदोलनों कोराष्ट्रीय मंच प्रदान किया।

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Published

01-08-2026

How to Cite

चेतन कुमार, & डॉ. पूनम. (2026). भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे बिहार की भूमिका (1857-1947 तक )का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Educational Journal of Science and Engineering, 9(08), 58–62. Retrieved from https://iejse.com/journals/index.php/iejse/article/view/422