नरेंद्र कोहली के साहित्य में स्त्री-चेतना, सत्ता और नैतिक दायित्व : एक मानवतावादी अध्ययन
Abstract
यह शोध-पत्र हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार नरेंद्र कोहली के साहित्य में निहित स्त्री-चेतना, सत्ता-संबंध और नैतिक दायित्व की अवधारणा का मानवीय एवं वैचारिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। कोहली के उपन्यासों में स्त्री केवल सामाजिक पीड़िता या प्रतीकात्मक पात्र नहीं है, बल्कि वह एक सजग, विवेकशील और नैतिक चेतना से युक्त मानवीय इकाई के रूप में उभरती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कोहली की स्त्री सत्ता से टकराव नहीं करती, बल्कि उसे मानवीय, उत्तरदायी और नैतिक बनाने की प्रक्रिया में सहभागी बनती है। शोध का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कोहली का स्त्री-विमर्श भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में एक संतुलित, संवादात्मक और नैतिक दृष्टि विकसित करता है, जो पश्चिमी संघर्षात्मक नारीवादी अवधारणाओं से भिन्न है।
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