नरेंद्र कोहली के साहित्य में स्त्री-चेतना, सत्ता और नैतिक दायित्व : एक मानवतावादी अध्ययन

Authors

  • शमा रमोला शोधार्थी, हिन्दी विभाग,फोनिक्स यूनिवर्सिटी, रुड़की

Abstract

यह शोध-पत्र हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार नरेंद्र कोहली के साहित्य में निहित स्त्री-चेतना, सत्ता-संबंध और नैतिक दायित्व की अवधारणा का मानवीय एवं वैचारिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। कोहली के उपन्यासों में स्त्री केवल सामाजिक पीड़िता या प्रतीकात्मक पात्र नहीं है, बल्कि वह एक सजग, विवेकशील और नैतिक चेतना से युक्त मानवीय इकाई के रूप में उभरती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कोहली की स्त्री सत्ता से टकराव नहीं करती, बल्कि उसे मानवीय, उत्तरदायी और नैतिक बनाने की प्रक्रिया में सहभागी बनती है। शोध का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कोहली का स्त्री-विमर्श भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में एक संतुलित, संवादात्मक और नैतिक दृष्टि विकसित करता है, जो पश्चिमी संघर्षात्मक नारीवादी अवधारणाओं से भिन्न है।

References

कोहली, न. (1988). *महासमर* (खंड 1–5). नई दिल्ली: राजपाल एंड संस.

कोहली, न. (1996). *रामकथा*. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन.

कोहली, न. (2001). *अहल्या*. नई दिल्ली: राजपाल एंड संस.

कोहली, न. (2004). *शबरी*. नई दिल्ली: राजपाल एंड संस.

कोहली, न. (2009). *तोड़ो कारा तोड़ो*. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन.

मिश्र, न. (2012). *हिंदी उपन्यास में स्त्री-विमर्श*. नई दिल्ली: साहित्य अकादमी.

शर्मा, र. (2010). *भारतीय नारी चेतना और साहित्य*. वाराणसी: ज्ञानमंडल प्रकाशन.

पाण्डेय, प. (2015). स्त्री-चेतना की वैचारिक अवधारणा. *हिंदी साहित्य शोध पत्रिका*, 12(2), 45-5

वर्मा, स. (2018). आधुनिक हिंदी साहित्य में स्त्री-विमर्श. *समकालीन साहित्य*, 34(1), 21–35.

चक्रवर्ती, उ. (2003). *जेंडरिंग कास्ट: ए फ़ेमिनिस्ट दृष्टिकोण*. कलकत्ता: स्त्री पब्लिकेशंस.

बटलर, ज. (1990). *जेंडर ट्रबल: नारीवाद और पहचान का विघटन*. न्यूयॉर्क: रूटलेज.

द बोउवार, सि. (1949). *द सेकेंड सेक्स*. पेरिस: गैलिमार्ड.

Downloads

Additional Files

Published

01-08-2026

How to Cite

शमा रमोला. (2026). नरेंद्र कोहली के साहित्य में स्त्री-चेतना, सत्ता और नैतिक दायित्व : एक मानवतावादी अध्ययन. International Educational Journal of Science and Engineering, 9(08), 53–57. Retrieved from https://iejse.com/journals/index.php/iejse/article/view/421