भारतीय ज्ञान परम्परा में स्त्री दर्शन और समकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री अस्मिता

Authors

  • वंदना रिसर्च स्कॉलर, हिंदी विभाग, फोनिक्स यूनिवर्सिटी, रुड़की

Keywords:

भारतीय ज्ञान परंपरा, स्त्री दर्शन, स्त्री अस्मिता, समकालीन हिंदी साहित्य, नारी विमर्श, भारतीय दर्शन

Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा में स्त्री को केवल परिवार अथवा समाज की एक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि सृष्टि, शक्ति, ज्ञान, संस्कृति तथा नैतिक मूल्यों की आधारशिला के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। वैदिक साहित्य में स्त्री को पुरुष के समकक्ष ज्ञानार्जन,यज्ञ, दर्शन और समाजिक निर्णयों में सहभागी माना गया, जबकि उत्तर वैदिक एवं मध्यकालीन परिस्थितियों में उसकी समाजिक स्थिति क्रमशरू सीमित होती गई।आधुनिक काल में शिक्षा, लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक सुधार आंदोलनों तथा स्त्री-विमर्श के प्रभाव से स्त्री-अस्मिता का प्रश्न साहित्य और समाज के केंद्र में स्थापित हुआ।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित स्त्री-दर्शन तथा समकालीन हिंदी साहित्य में अभिव्यक्त स्त्री-अस्मिता का विश्लेषणात्मक एवं तुलनात्मक अध्ययन करना है। इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि समकालीन हिंदी साहित्य स्त्री को केवल शोषण और संघर्ष की प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि आत्मनिर्णय, समानता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता और सामाजिक परिवर्तन की सक्रिय वाहक के रूप में प्रस्तुत करता है। साथ ही यह भी प्रतिपादित किया गया है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के मानवीय एवं समतामूलक आदर्श आज भी स्त्री-अस्मिता के विमर्श को वैचारिक आधार प्रदान करते हैं। अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि समकालीन हिंदी साहित्य भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का पुनर्पाठ करते हुए स्त्री की गरिमा, समान अधिकार और स्वतंत्र व्यक्तित्व की स्थापना की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा एक न्यायपूर्ण एवं समावेशी समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।

References

डॉ उमा चक्रवर्ती, जाति समाज में पितृसत्ता, अनुवादक विजय कुमार झा

विश्वनाथ त्रिपाठी .मीरा का काव्य, वाणी प्रकाशन, दिल्ली प्रथम संस्करण 1989

रामचरितमानस, गोस्वामी तुलसीदास, गीता प्रेस

मन्नू भंडारी आपका बंटी राधा कृष्ण प्रकाशन

महादेवी वर्मा श्रृंखला की कड़ियां लोकभारती प्रकाशन

Downloads

Additional Files

Published

01-08-2026

How to Cite

वंदना. (2026). भारतीय ज्ञान परम्परा में स्त्री दर्शन और समकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री अस्मिता. International Educational Journal of Science and Engineering, 9(08), 50–52. Retrieved from https://iejse.com/journals/index.php/iejse/article/view/420